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पंजाबी (Punjabi) भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तरी भाग में बसने वाली एक जाति है। इतिहास में कई खत्री राजा हुए हैं, जिन्होंने 2000 सालो तक राज किया। मूल रूप से खत्री पंजाब (विशेषकर वो हिस्सा जो अब पाकिस्तानी पंजाब है) से हुआ करते थे । ये जाति क्षत्रिय है। खत्री पंजाब की मुख्य जाति है जो हिन्दू हैं। ऐतिहासिक रूप से सभी सिख पंथ के सारे १० गुरु खत्री थे।

पंजाबी की कई उपजाति हैं। इनमें भी एक विशेष प्रकार का पदानुक्रम है, जो हैं:- कपूर, खन्ना, मेहरोत्रा, मल्होत्रा, मेहरा, गुजराल, टंडन, चोपड़ा, विज और वाही, कोहली, सेठी, आनन्द, भसीन, सभरवाल साहनी, सूरी और चड्ढा सूद भाटिया आते हैं।

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खत्री (Khatri) भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तरी भाग में बसने वाली एक जाति है। इतिहास में कई खत्री राजा हुए हैं, जिन्होंने 2000 सालो तक राज किया। मूल रूप से खत्री पंजाब (विशेषकर वो हिस्सा जो अब पाकिस्तानी पंजाब है) से हुआ करते थे । ये जाति क्षत्रिय है। खत्री पंजाब की मुख्य जाति है जो हिन्दू हैं। ऐतिहासिक रूप से सभी सिख पंथ के सारे १० गुरु खत्री थे।

खत्री के कई उपजाति हैं। इनमें भी एक विशेष प्रकार का पदानुक्रम है, जो हैं:- कपूर, खन्ना, मेहरोत्रा, मल्होत्रा, मेहरा, गुजराल, टंडन, चोपड़ा, विज और वाही, कोहली, सेठी, आनन्द, भसीन, सभरवाल साहनी, सूरी और चड्ढा सूद भाटिया आते हैं।

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जीवन के सबसे नाज़ुक क्षणों में, हम करुणा, गरिमा और सम्मान के साथ आपके साथ खड़े हैं। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी एक गैर-लाभकारी समुदाय-आधारित पहल है जो दुःख की घड़ी में परिवारों को विश्वसनीय शव वाहन सेवाएँ (अंतिम यात्रा सेवा) प्रदान करने के लिए समर्पित है।

श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी शहर में सामाजिक, धार्मिक और मानवीय सेवा कार्यों को निरंतर रूप से आगे बढ़ा रही है। कमेटी का लक्ष्य समाज के जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुँचाना और विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्यों को सुचारू रूप से सम्पन्न करना है। इसी उद्देश्य से कमेटी द्वारा भोजन वितरण, स्वास्थ्य सहायता, धार्मिक आयोजन, आपदा राहत कार्य, एंबुलेंस सेवा तथा अन्य अनेक जन-सेवा गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।

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महर्षि दयानन्द आर्ष गुरुकुल आश्रम की स्थापना वर्ष 2010 में भारतीय दर्शन, वैदिक परंपरा एवं राष्ट्रभाव को सशक्त करने के उद्देश्य से की गई। यह संस्था पूर्वोत्तर भारत के वनवासी, निर्धन एवं वंचित परिवारों के बच्चों को शिक्षा, संस्कार और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने के लिए समर्पित है।

भारतीय संस्कृति में गुरुकुल परंपरा का विशेष स्थान रहा है। इसी परंपरा को पुनर्जीवित करने तथा वैदिक एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय के माध्यम से चरित्रवान नागरिक निर्माण करने का संकल्प लेकर इस आश्रम की स्थापना की गई।

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